Intolerance against Hanuman Chalisa

जय श्रीराम तथा हनुमान चालीसा से कष्ट क्यों?

हिन्दू धर्म में जय श्रीराम,हर-हर महादेव या हनुमान चालीसा का पाठ शक्ति संचय कर पापियों के सर्वनाश के लिए कर्मरत होने का मंत्र है। इसलिये पापियों और राक्षसी प्रवृतियों वाले, शैतानों को कष्ट होता है।उनके पार्थिव शरीर तथा आत्मा में अग्नि दहन का एहसास होता है। इसीलिए नकाबपोश छद्म वेषधारी सूर्पनखा एवं रावण को इनके नाम से भी नफरत है।ऐसा भी माना जाता है कि भूत-पिशाच, डाकिन आदि इनके नामोच्चारण मात्र से आगबबूला हो पागलों की तरह नंगे नाचने लगते हैं।

पाकिस्तान और बांग्लादेश में मंदिरों को शैतान जिहादी राक्षसों द्वारा तोड़ा जाना आम बात है परन्तु आजकल यही घटनाएँ कोंग्रेस ,मुस्लिम बहुल तथा ईसाई शासित प्रदेशों में भी देखा जा रहा है। हाल में अलवर तथा तमिलनाडु में यह देखा गया है। ईसाई तथा मुस्लिम इलाकों में मंदिरों को, मूर्तियों को ध्वस्त करने की क्रूरतापूर्ण कार्यवाही; सरकारी समर्थन के साथ जारी है। इन इलाकों में उच्चतम न्यायालय या उच्चन्यायालय कभी स्वतः संज्ञान लेकर वहाँ के मुख्यमंत्री या विधायकों के खिलाफ कार्यवाही कर ऐसे विध्वंसक कृत्यों पर रोक नहीं लगाती है जो दुःखद है।

केरल में मंदिरों की जमीन तथा मंदिरों पर अवैध कब्जा कर उसे चर्च में परिवर्तित कर सनातन धर्म को मिटाने का भी प्रयत्न किया जा रहा है।मंदिरों की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण कर गैर हिन्दुओं पर खर्च करना, चर्च तथा मस्जिदों का विकास करना, हिन्दुओं को धर्म-परिवर्तन के लिए बाध्य करना,स्वधर्म पालन करने के लिए उन्हें प्रताड़ित एवँ अपमानित किया जाना आम बात है। भेदभाव की पराकाष्ठा यह है कि बिजली के बिल भी मंदिरों को मस्जिद तथा चर्च की तुलना चार गुना ज्यादा के रेट पर उपलब्ध कराया जाता है। बहुत से स्कूल जिसका खर्च मंदिर के चढ़ावे से चलाया जाता है वहाँ भी संस्कृत शिक्षकों की भर्ती को बाधित कर उर्दू को थोपा जा रहा है। हिन्दुओं के बच्चों को स्कूल में स्वधर्म त्याग कर ईसाइयत या इस्लाम कबुलवाने की कोशिश जैसे अनैतिक कार्य सरकारी संरक्षण में हो रहे हैं; जिसके विरोध में उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए प्रतिरोधी को जेल में डाल दिया जा रहा है।

केरल ,तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश,पश्चिम बंगाल के अलावे मंदिर को ध्वस्त कर,सनातन हिन्दू धर्म को खत्म करने की प्रक्रिया अब राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र तथा दिल्ली में भी चालू हो गयी है। प्रत्येक प्राचीन हिन्दू त्यौहार पर व्यवधान उपस्थित करना,मूर्तियाँ तोड़ना, पत्थरबाजी करना लगभग सभी राज्यों में मुसलमानों द्वारा किये जा रहे हैं। जिनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही आवश्यक होने के बावजूद वहाँ की सरकार इसे नहीं कर रही है। झूठे सेलेक्टिव सेक्युलर हिन्दू नेता भी मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हुए हैं।

यूँ वामपंथी पत्रकारों और वकीलों का काम ही सच को झूठ तथा झूठ को सच साबित करना है परन्तु हिन्दुओं के विरोध में हमेशा गलत बयानबाजी इन वामपंथियों के प्रति घृणा उत्पन्न करती है। नेताओं, प्रशासकों वकीलों का व्यक्तिगत स्वार्थ सबसे ऊपर होने के कारण इनके लिये सनातन धर्म, संस्कृति की सुरक्षा या देशहित कोई अर्थ नहीं रखता है। हाल में अलवर के तीन सौ साल पुराने मंदिर का तोड़ा जाना गहलौत और दिग्विजय की सनातन धर्म के प्रति घृणा-अवहेलना तथा मुस्लिम तुष्टिकरण को प्रदर्शित करती है। ये लोग मीडिआ पर पूरे देश के सामने ऎसी बयान बाजी करते हैं कि इन्हें बेशर्म, घटिया तथा नीच प्रवृत्ति का गिरगिट कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हिन्दुओं को नीचा दिखाने के कारण नेताओं के स्वयँ का व्यक्तित्व नफरत के लायक है। राज्यों में जहाँ भी घुसपैठियों को आश्रय दिया गया है वहाँ के इलाकों में लगभग सभी हिन्दू त्योहारों पर पत्थरबाजी,हत्याएँ, आगजनी और तोड़फोड़ की जा रही है। किसी न किसी बहाने पूरी तैयारी के साथ घरों-दुकानों को आग के हवाले किया जा रहा है। हिन्दुओं के बच्चों की हत्या,औरतों की बेइज्जती करने जैसे जघन्य अपराध बेधड़क हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा दंगाईयों की हिफाजत, मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दुओं को निचोड़ने का काम प्रायः सभी नेता कर रहे हैं।

हास्यप्रद है या दयनीय! परन्तु सत्य है कि घुसपैठियों, जिहादियों,रोहिंज्ञाओं, मुसलमानों को हिंदुस्तान जितना रोजगार, खाना-इलाज आदि मुफ्त में प्रदान कर रहा है, वे उसी के अनुपात में हिन्दुओं तथा मंदिरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। दिल्ली में गुंडापालित खेजड़ीवालकाल में दिल्ली और अब पंजाब भी काल के गाल में जा रहा है। विभिन्न जगहों पर होने वाले दंगे-फसाद वहाँ की विज्ञापन-विशेषज्ञ- सरकार की अकर्मण्यता को प्रदर्शित करते हुए अवैध तस्करों, दंगाईयों, घुसपैठिये बंगदेशियों के साथ उनकी साझेदारी को भी प्रमाणित करती है।

संविधान की अवहेलना, देश के कानून, भारत की न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देना वामपंथियों का प्रिय शगल है। अलगाववादी आतंकी भावनाओं को समर्थन देने वाले मुसलमानों को कोर्ट का निर्णय सिर्फ स्वयँ के ही समर्थन में चाहिए होता है। अगर कोर्ट आतंकवादियों के पक्ष में निर्णय देती है तो देश सेक्युलर कहलाती है। यदि कोर्ट हिन्दुओं की सुरक्षा के हित दंगाइयों के विरुद्ध निर्णय देती है तो मुस्लिम नेताओं द्वारा कोर्ट को भी कम्युनल कह दिया जाता है। दिए गए निर्णय को बार-बार चुनौती दी जाती है। सारी सुविधाओं का फायदा लेते हुए भी मुसलमानों के लिए स्वयँ को प्रताड़ित किये जाने का ड्रामा, दुनियाँ भर में भारत को,बीजेपी को आर एस एस को बदनाम करना,उन्हें गाली देना, हत्यारों की तरफदारी करना इनकी आदत में शुमार है। अपने ग्लोबल जिहाद के तहत ये निरंतर कुरान के उन नियमों पर चलते हैं जिसमें ग़ैरइस्लामियों को खत्म करना उनके कौम का मकसद है।

" पैगम्बर ने इन्हें कुरान के रूप में जिहाद नामक हथियार पकड़ाया है कि यदि तुम्हारे साथ कोई कुफ़्र अच्छा व्यवहार करता है; तो वह अल्लाह की नियामत है; इसलिये उसे दोस्ती का वास्ता दे कर मुसलमान बनाओ। यदि कोई ग़ैरइस्लामी इस्लामी मझहब के अंदरूनी दरिंदगी एवं गंदगी को जान कर तुम्हें समझाने की कोशिश करे या उसकी निंदा करे तो उसे पैगम्बर के हुक्मों की निंदा समझो उसका विरोध करो, उसे मार डालो। दोस्ती या दुश्मनी में भी जो ग़ैरइस्लामी तुम्हारे मज़हबियों के फायदे के लिये तुम्हारे मन्तव्यों से सहमत न हो सके,बात न माने तो धोखे से या जबरन उनसे इस्लाम कबूल करवाओ या उसे मार डालो। उसकी जायदाद तथा औरतों को मुस्लिम जमातियों के बीच आपस में बाँट लो ताकि अल्लाह की नियामत तुम पर बनी रहे'"।

देश की संस्कृति, सभ्यता एवं देशहित के प्रति मोदीजी की सजगता, सेना को शक्तिशाली बनाना,घुसपैठियों, आतंकियों तथा अवैध रोहिंज्ञाओं के खिलाफ की जाने वाली कार्यवाही बामपंथियों के हृदय को जला रहा हैं,जो देश के लिए खतरनाक है। इन बामपंथियों को वैटिकन तथा जिहादियों के इशारे पर नाचने की आदत है अतः वे सनातन धर्म को खत्म करने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं । हाल में महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा के पाठ के खिलाफ लिये गए कार्यवाही ने बता दिया है कि भूत-पिशाच जैसे नेताओं को हनुमान चालीसा के पाठ से तिलमिलाहट होती है ठीक उसी तरह जैसे बंगाल की डाकिन को रामचंद्र जी नामोच्चारण से होती है। वर्ग विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए एकतरफा उदारवादी धर्म निरपेक्षता का नाटक जिसमें सारे नियम हिन्दुओं और मंदिरों को लूटने के लिए बने हैं का खात्मा अति आवश्यक हो गया है। इसलिए हिन्दुओं को एकजुटता के साथ आवाज उठाने की तथा उच्चतम न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेने की आवश्यकता है। हर-हर महादेव का तांडव, जय श्रीराम का आत्मिक उन्नयन उद्घोष, कृष्ण की गीता का उपदेश, हनुमानजी की ज्वलित पूँछ ही राक्षसीप्रवृतियों वाले शैतानों को सदमार्ग पर ला सकती है। इसीलिए...

भूत-पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै।

"जय जय जय हनुमान गोसाईं,कृपा करहुँ गुरुदेव की नाईं।।

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Authored by Dr. Sumangala Jha (chief editor) and Dr. Vidya Nath Jha
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